- एसआईआर ने लगभग 58 लाख लोगों के नाम काटे।
- आपत्ति केलिए आपके पास लगभग 1 महीने का समय है।
नमस्कार साथियों: पश्चिम बंगाल में एसआईआर (Wast Bengal SIR) की प्रक्रिया कंप्लीट हो चुका है, और लगभग 58 लाख लोगों के नाम काटे गए हैं चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर उन नाम की सूची भी अपने वेबसाइट पर जारी कर दिए हे। जिनके नाम एसआईआर सूची से हटाया गया है, इसका इंपैक्ट क्या होगा क्योंकि 58 लाख की जो संख्या है एक बहुत बड़ा नंबर होता है। जिन लोगों के नाम काटे गए उनमें कई ऐसे लोग थे जो पलायन कर चुके थे, कहीं ऐसे थे जो इस देश के नागरिक नहीं थे, कई ऐसे थे जिनका निधन हो चुका है और कई ऐसे भी थे जिनके पास दो दो ईपीआईसी नंबर थे। तो क्या हे ताजा खबर हम इसमें बताए हुआ है।
अगले साल बंगाल में चुनाव होने वाला है आप उसे चुनाव के लिए जो एसआईआर प्रक्रिया जैसे कि इससे पहले बिहार में भी हुआ और अब उसके बाद पूरी देश में चलाई जा रही है। दरअसल उन्होंने कहा कि यह जितने भी एसआईआर फॉर्म थे अनकटीबल पाए गए हैं। अगर आपको जो डाटा सामने आया है वह बताऊं तो कुल मिलाकर 58,20,898 बोलोरो के जो नाम है यहां पर कटा हुआ है।
नाम काटने की वजह क्या?
एसआईआर जो नाम काटा हुआ हे ओ करीब 58,20,898 लोगों के नाम यहां पर एसआईआर मैं जो मसूदा सूची है वहां से हटा दिया गया है जिसमें निधन लोग सबसे ज्यादा पाए गए हैं, 24,16,852 बही 19,88,076 लोग ऐसे थे जो पलायन कर चुके थे। 12,20,038 यहां पर लापता मिले हे। इसके अलावा 1,38,328 नाम ऐसे थे जो डुप्लीकेट मिला है। 57,604 लोग ऐसे पाए गए हैं जिनकी वजह अभी पूरी पूरी तरीके से क्लियर नहीं हो पाई है।
विधानसभा केंद्र से कितने नाम काटा?
सबसे पहले भवानीपुर की बात करें तो वहां पर 44,787 लोगों के नाम काटने की जानकारी आ रहा है, नंदीग्राम मैं 10,599, चौरंगी में 74,553 नाम काट चुका है और जोड़ासांको क्या अगर हम बात करते हैं तो 72,400 ओर कोलकाता पार्टी में 63,730 की लोग का नाम कटा हे।
ममता की टेंशन बढ़ेगी?
देखिए उनका टेंशन बढ़ते हुए नजर आ रहा हे, उनकी टेंशन बढ़ेगी ही क्योंकि अगर आप देखे तो शुरुआत से ही जब से एसआईआर का पक्रिया शुरू हुआ हे। ममता बनर्जी इसका विराज करते हुए नजर आ रही है और उन्होंने यहां तक कह दिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए हम बंगाल में एसआईआर होने ही नहीं देंगे। हालांकि अभी पूरा हो चुके लेकिन ममता बनर्जी का अगर आपको वह बयान याद होगा उन्हें कहा था कि “अगर एक भी वोटर का नाम एसआईआर में काटा जाता हे तो वो विरोध करेंगे ओर उहोंने ये भी कह दिया था कि जो महिलाएं अपने किचेन के जो हत्यार है वह लेकर खड़े हो जाएगा लेकिन एक भी नाम यहां पर काटने नहीं देगे”। तू हिसाब ही है कि ममता बनर्जी का टेशन बढ़ते हुए नजर आ रही है।
कब तक मौका हे?
नंबर मौका दिया गया है आज से ही शुरू हो चुका है 16 दिसंबर 2025 से लेकर आप अगले साल 15 जनवरी 2026 तक आप अपनी आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। अगर आपको लगता है। तो बोला जाए तो एक महीने का वक्त दिया गया है।
डिटेल कहा सबमिट होगा
आपको लग रहा है कि कुछ भी गड़बड़ी हुई है तो आपके पास लगभग 1 महीने का समय है। इस एक महीने के दौरान में आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीके से अपनी आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।
तो हम आपको बताएं कि किस तरीके से कितने लाख लोगों के नाम काटे गए हैं इसका सियासी इंपैक्ट क्या होगा और अगर लगता है कि किसी का नाम छूट गया है उसे लिस्ट में नहीं है तो उसके पास 1 महीने का पूरा वक्त है। ऑनलाइन चाय नहीं तो ऑफलाइन जाए अपनी आपत्तियां दर्ज करें और अपने नाम को एसआईआर के जरिए मतदाता सूची में कर सकते हैं। तो यह था आज का अपडेट नमस्कार साथियों।
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