वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए कहा कि UPI आम नागरिक और व्यापारियों के लिए पूरी तरह से मुक्त रहेगा। बैंक और प्रमुख फिनटेक कंपनियों जैसे PhonePe, Paytm, Google Pay में UPI ट्रांजेक्शन पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाना चाहते थे। लेकिन सरकार इस प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया है। बजट में UPI और RuPay डेबिट कार्ड की लेनदेन पर 2,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव
वित्त मंत्रालय और आरबीआई का मानना है कि अगर UPI यूजर्स पर कोई शुल्क लगता है, तो डिजिटल भुगतान की धीमी पड़ सकती है और कैश पर निर्भरता बढ़ सकती है। इसलिए सरकार ने 2,000 करोड़ रुपए का सब्सिडी प्रावधान जारी किए है। वित्त मंत्रालय की कहना है कि यदि भविष्य में स्थिति बदलती है, तो कुछ महीने बात इसके ऊपर विचार की जाएगी।
जनवरी 2026 में UPI का रिकॉर्ड
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार कुल लेनदेन 2,170 करोड़ और कुल मूल्य 28.33 लाख करोड़ रुपए है। दैनिक प्रयाग को लेनदेन 70 करोड़ है, जो दिसंबर 2025 की लेनदेन में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है। यह रिपोर्ट ये दिखाता है कि अब UPI भारत की रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था बन चुकी है।
बैंक और फिनटेक कंपनियों की निराशा
बैंक और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि मौजूदा सब्सिडी लंबे समय से टिकाऊ नहीं है। बे दबा करते हैं कि स्केलिंग और नए फीचर्स के लिए निवेश बढ़ रहा है, फ्रॉड रोकथाम सिस्टम में भारी खर्च आ रहा है और ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क विस्तार की अतिरिक्त शुल्क उठानी पड़ रही है। उनका तर्क है कि बड़े मर्चेंट पेमेंट से मामूली फीस लेकर छोटे यूजर्स को मुक्त दुविधा दी जा सकती है।
आगे क्या होगा?
वित्त मंत्रालय और आरबीआई के स्पष्ट किया है कि अगर भविष्य में UPI पर लागत बहुत ज्यादा बढ़ती है या सब्सिडी मॉडल टिकाऊ नहीं रहता है, तो कुछ महीनों बाद फिर से विमर्श किया जाएगा। अभी के लिए कोई भी शुल्क नहीं लगेगा।
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