Rajasthan Budget 2026-27: राजस्थान सरकार अगले वित्त वर्ष 2026-27 में प्रदेशवासियों पर किसी भी नए प्रकार का टैक्स नहीं लगाएगी, लेकिन इसके बावजूद राज्य के खजाने पर वेतन और पेंशन का बोझ इतना बढ़ेगा कि खुद के कर राजस्व से होने वाली कमाई से कहीं ज्यादा राशि कर्मचारियों और पेंशन भोगियों को देने में चली जाएगी।
राज्य के बजट अनुमानों के अनुसार अगले वित्त वर्ष में सरकार को खुद के कर राजस्व से कुल ₹34,000 करोड़ मिलने का अनुमान है। लेकिन इसमें से ₹59,000 करोड़ सिर्फ जीएसटी और आबकारी शुल्क के रूप में खजाने में आने की उम्मीद है। लेकिन वेतन और पेंशन के मध्य में सरकार को ₹85,000 करोड़ खर्च करने पड़ेंगे। यानी कुल मिलाकर वेतन-पेंशन पर होने वाला खर्च खुद के कर राजस्व से लगभग 2.5 गुना ज्यादा होगा। यह स्थिति राज्य की वित्तीय व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती पेश करती है।
कुल राजस्व का अनुमान और करों की हिस्सेदारी
राज्य सरकार को अगले वित्त वर्ष में करीब राजस्व ₹729 करोड़ मिलने का अनुमान है। इसमें से कर राजस्व की हिस्तेदारी ₹34,000 करोड़ राशि गई है। इस कर राजस्व में सबसे बड़ी हिस्तेदारी इन स्रोतों (Sources) से आती है,
- जीएसटी और वैट: 59.21% (लगभग ₹1,98,000 करोड़ का अनुमाना
- स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्कः 13.1%
- आबकारी शुल्कः महत्वपूर्ण हिस्सा (जीएसटी के साथ मिलाकर)
- वाहन कर: 4.73%
- विद्युत ड्यूटी और भू-राजस्वः बाकी हिस्सा
सरकार के अनुमान के मुताबिक आर्थिक और कारोबार गतिविधियों में तेजी के कारण जीएसटी से 1.5 लाख करोड़ और वैट से 48,000 करोड़ की राजस्व हासिल किया जा सकेगा। अगर केंद्र सरकार ने जीएसटी दरों में कोई बदलाब नहीं किया और राज्य ने पेट्रोल और डीजल पर वैट नहीं बढ़ाया, तो इन दो कारों से कुल राजस्व का 59.21% हिस्सा आयेगा।
वेतन और पेंशन पर खर्च का बोझ
अगले वित्त वर्ष में सरकार के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा वेतन के ₹18,83,000 करोड़ (1883 करोड़) और पेंशन के ₹1,20,000 करोड़ (1.2 लाख करोड़) में जाएगा। यानी कुल मिलाकर वेतन और पेंशन पर ₹1,38,83,000 करोड़ खर्च की अनुमान है।
क्या नया टैक्स लगेगा?
सरकार में स्पष्ट किया है कि प्रदेशवासियों पर किसी तरह का नया टैक्स नहीं लगाया जाएगा। इसका मतलब है कि, कोई नया कर नहीं लगेगा, मौजूदा कर दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी और पेट्रोल-डीजल पर वैट दरें नहीं बढ़ाई जाएंगी।
वेतन और पेंशन में खर्च क्यों इतना बढ़ रहा है?
इस खर्च बढ़ोतरी में मुख्य कारण, कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि, समय-समय पर महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का लागू होना, पेंशनभोगियों की संख्या में लगातार इजाफा और पुरानी पेंशन योजना के तहत आने वाले कर्मचारियों की पेंशन।