PM Awas Yojana: फर्जी जियो टैगिंग और गलत लोकेशन पर लाभ से वंचित, सरसपुर में एक आवेदक का खुलासा

Published On: March 8, 2026

PM Awas Yojana: प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण (PMAY-G) योजना के तहत आवास निर्माण का लाभ लेने के लिए आवेदन करते समय जियो टैगिंग और लोकेशन की जानकारी अब बहुत सख्ती से जांच की जा रही है। अगर आवेदन के समय खाली प्लॉट की जियो टैगिंग या लोकेशन गलत दर्ज की गई हो, तो आवास के लाभ से वंचित रहना पड़ सकता है। इसी तरह फर्जीवाड़ा करके किसी दूसरे व्यक्ति के प्लॉट की जियो टैगिंग अपलोड कर दी जाए, तो ऐसे आवेदकों को पूरी तरह सूची से बाहर कर दिया जाता है। यानी अब योजना में किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़े या घालमेल की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है।

वित्त वर्ष 2025-26 में सत्यापन प्रक्रिया

विभागीय सूत्रों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में सर्वे के दौरान जिले में करीब 3200 लोगों ने आवास निर्माण के लिए आवेदन किए थे। लेकिन सत्यापन के दौरान इनमें से 92 से ज्यादा अपात्र लोग बाहर हो गए। हालांकि वास्तविक डाटा आने में अभी और समय लग सकता है और अपात्रों की संख्या भी बढ़ सकती है। सत्यापन टीमों ने पात्रता की हर शर्त की गहराई से जांच की। इसमें शामिल हैं:

  • आवेदक का नाम ग्राम पंचायत की सूची में होना
  • परिवार की आय सीमा के अंदर होना
  • आवासीय प्लॉट का स्वामित्व या वैध अधिकार होना
  • जियो टैगिंग से प्लॉट की सही लोकेशन का मिलान होना
  • परिवार में पहले से PMAY-G का लाभ न लेना

सरसपुर का मामला

सत्यापन के दौरान एक गंभीर मामला सरसपुर क्षेत्र से सामने आया। एक आवेदक ने आवास निर्माण का लाभ लेने के लिए दूसरे व्यक्ति के खाली प्लॉट की जियो टैगिंग कर आवेदन के समय पोर्टल पर दर्ज कर दी। अपने आप को पात्रता की श्रेणी में दिखाने के लिए आवेदक ने पोर्टल पर सभी सूचनाएं सही-सही दर्ज की। लेकिन सत्यापन टीम के सदस्य जब मौके पर पहुंचे तो पोर्टल पर दर्ज जियो टैगिंग वाली खाली जमीन किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर मिली।

योजना में फर्जीवाड़े पर अब लगाम

प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना में पहले कई स्तरों पर फर्जीवाड़े की शिकायतें आती थीं। जैसे:

  • गलत जियो टैगिंग से फर्जी प्लॉट दिखाना
  • दूसरे के नाम पर आवेदन करना
  • परिवार में एक से ज्यादा सदस्यों का आवेदन
  • आय प्रमाण-पत्र में हेराफेरी

अब जियो टैगिंग, सैटेलाइट मैपिंग, आधार लिंकेज और विकास खंड स्तर पर फील्ड सत्यापन से इन सब पर लगभग पूरी तरह रोक लग चुकी है। सत्यापन टीमों को मोबाइल ऐप और GPS आधारित टूल दिए गए हैं, जिससे प्लॉट की सही लोकेशन और स्वामित्व (Ownership) का तुरंत मिलान हो जाता है।

सत्यापन के दौरान सामने आए अन्य खुलासो

विभागीय सूत्रों ने बताया कि सत्यापन में कई ऐसे मामले सामने आए जहां आवेदक नेः

  • प्लॉट की जगह खेत या बंजर जमीन की जियो टैगिंग अपलोड की
  • परिवार के सदस्यों के नाम पर अलग-अलग आवेदन किए
  • आय प्रमाण-पत्र में गलत जानकारी दी

इन सभी मामलों में आवेदन खारिज कर दिए गए। अपात्रों की संख्या बढ़ने की संभावना है क्योंकि कुछ इलाकों में सत्यापन कार्य अभी भी चल रहा है।

आवेदकों के लिए जरूरी सलाह

आवेदन करते समय प्लॉट की जियो टैगिंग ओर लोकेशन बहुत सावधानी से दर्ज करें।

  • प्लॉट का स्वामित्व स्पष्ट और वैध होना चाहिए।
  • परिवार में एक से ज्यादा आवेदन न करें।
  • ई-केवाईसी ओर आधार लिंकेज पहले से पूरा कर लें।
  • सत्यापन टीम के आने पर पूरी सहयोग करें।

अंतिम बात

प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना अब सख्त सत्यापन और पारदर्शी प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ रही है। फर्जी जियो टैगिंग और गलत लोकेशन पर लाभ से वंचित होना अब तय है। सरसपुर का मामला इसका स्पष्ट उदाहरण है। 3200 आवेदनों में 92 से ज्यादा अपात्र बाहर होना और संख्या बढ़ने की संभावना दर्शाती है कि सरकार योजना को सही लोगों तक पहुंचाने के लिए कितनी गंभीर है।

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Ashutosh Behera

I am Ashutosh, graduate complete in electrical engineering. i am staying in Jagatsinghpur, Odisha, belong in village, this is my website.

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