Impact of Iran War On India: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की संभावनाएँ मजबूत होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। इस घटनाक्रम का सीधा असर भारत के चावल निर्यात और घरेलू पेट्रोल-डीजल कीमतों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीजफायर स्थायी होता है, तो समुद्री भाड़े और बीमा प्रीमियम में कमी आने से चावल निर्यात लागत घटेगी और भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट की संभावना बढ़ जाएगी।
समुद्री भाड़े और बीमा प्रीमियम में भारी उछाल
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ गया है। कई शिपिंग कंपनियों ने अपने रूट डायवर्ट कर दिए हैं, जिससे ट्रांजिट टाइम बढ़ गया है। परिणामस्वरूप समुद्री भाड़ा पहले के $200-400 प्रति कंटेनर से बढ़कर $2,500 तक पहुंच गया है। साथ ही हाई रिस्क जोन में भेजे जाने वाले कार्गो पर बीमा कंपनियां अतिरिक्त प्रीमियम वसूल रही हैं। ये दोनों फेक्टर चावल निर्यात की कुल लागत को काफी बढ़ा रहे हैं।
चावल निर्यात पर क्या असर?
भारत से चावल निर्यात फिर शुरू हो गया है, लेकिन बाजार की स्थिति अस्थिर बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि बढ़ी हुई लागत और जोखिम के बावजूद मिडिल ईस्ट में भारतीय चावल, खासकर बासमती की मांग अभी भी मजबूत है।
एक चावल निर्यातक शिवम ने बताया कि मौजूदा समय में बाजार पूरी तरह अनिश्चित है। एक ओर लागत तेजी से बढ़ रही है, दूसरी ओर कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे हालात में व्यापार करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन मांग बनी रहने से निर्यात गतिविधियां जारी है।
भारत पर संभावित प्रभाव
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
- चावल निर्यात की लागत घट सकती है, जिससे निर्यातकों को फायदा होगा।
- समुद्री भाड़े और बीमा प्रीमियम में कमी आने से कुल निर्यात लागत प्रभावित होगी।
आगे क्या देखना होगा?
- अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का अगला दौर।
- स्ट्रेट ऑफ हरमुज की स्थिति और शिपिंग रूट्स में बदलाव।
- कच्चे तेल की कीमतों की दिशा।
- भारत सरकार की पेट्रोल-डीजल टैक्स नीति में कोई राहत।
अंतिम बात
मिडिल ईस्ट तनाव कम होने के संकेत से कच्चे तेल की कीमतों में 2% की गिरावट आई है। समुद्री भाड़ा $200-400 से बढ़कर $2,500 तक पहुंच गया है, जिससे चावल निर्यात की लागत बढ़ी है। फिर भी मिडिल ईस्ट में भारतीय चावल की मांग मजबूत बनी हुई है।
यदि सीजफायर स्थायी होता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद बढ़ जाएगी, जिससे आम जनता को महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है। अभी देखना यह होगा कि दोनों देशों के बीच समझौता कितना मजबूत होता है और भारत सरकार इस गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक कैसे पहुंचाती है।
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