World’s Largest Oil Reserves Country: मध्य पूर्व में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को फिर से हिला दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने उन देशों की चिंता बढ़ा दी है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसी स्थिति में हर देश अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) का सहारा लेता है। ये भंडार आपातकाल, युद्ध या सप्लाई चेन में रुकावट के दौरान बाजार को स्थिर रखने और घरेलू मांग पूरी करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
चीन के पास सबसे बड़ा तेल भंडार
रिपोर्टस के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा रणनीतिक तेल भंडार चीन के पास हैं। चीन के सरकारी भंडार में करीब 900 मिलियन बैरल कच्चा तेल मौजूद है। यह संख्या चीन की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, औद्योगिक मांग और ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति को दर्शाती है। चीन ने पिछले दो दशकों में तेल आयात में भारी वृद्धि देखी है और इसी वजह से उसने दुनिया के सबसे बड़े रिजर्व बनाने पर जोर दिया है।
अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR)
अमेरिका के पास दुनिया का सबसे पुराना और सबसे प्रसिद्ध रणनीतिक तेल भंडार हे – Strategic Petroleum Reserve (SPR)। रॉयटर्स ओर US Energy Information Administration (EIA) की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के सरकारी SPR में करीब 415.4 मिलियन बैरल कच्चा तेल मौजूद है। इसके अलावा निजी कंपनियों के पास कमर्शियल स्टॉक के रूप में लगभग 439.3 मिलियन वैरल तेल जमा है।
जापान के पास दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक
जापान के पास सरकारी रिजर्व में लगभग 260 मिलियन बैरल कच्चा तेल मोजूद है। पूरे देश में सरकारी और निजी मिलाकर लगभग 470 मिलियन बैरल तेल के बराबर भंडार जमा है। जापान के सरकारी रिजर्व से अकेले लगभग 146 दिनों की आयात जरूरत पूरी हो सकती है।
जर्मनी का तेल भंडार और आपातकालीन योजना
जर्मनी के पास सरकारी और निजी स्तर पर करीब 110 मिलियन वैरल कच्चा तेल और 67 मिलियन वैरल तैयार पेट्रोलियम उत्पाद जमा है। देश की अर्थव्यवस्था मंत्रालय के अनुसार जरूरत पड़ने पर इन भंडारों को कुछ ही दिनों के भीतर बाजार में उतारा जा सकता है। जर्मनी ने 2022 के रूस-पूक्रेन संकट में अपने भंडार का इस्तेमाल किया था और अब भी 90 दिनों की आयात जरूरत के बराबर स्टॉक बनाए रखता है।
भारत के पास कितना तेल भंडार?
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के पास करीब 39 मिलियन वैरल तेल का रणनीतिक भंडार है। भारत ने इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के कहने पर रिजर्व ऑयल रिलीज करने से इनकार कर दिया था। IEA और 37 देशों ने वैश्विक बाजार में कीमतें कम करने के लिए रणनीतिक भंडार रिलीज करने की अपील की थी। भारत के तीन मुख्य रणनीतिक भंडार हैं विशाखापत्तनम, मंगलौर और पदुर (कर्नाटक)। इनकी कुल क्षमता करीब 5.33 मिलियन टन (लगभग 39 मिलियन बेरल) है।
अंतिम बात
ईरान-इजराइल तनाव ने फिर से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। चीन के पास 900 मिलियन बेरल, अमेरिका के पास 415.4 मिलियन बैरल SPR, जापान के पास 470 मिलियन बेरल और जर्मनी के पास 177 मिलियन बेरल के भंडार हैं। भारत के पास 39 मिलियन बेरल का स्टॉक है, जो अभी काफी कम है। भारत को भंडार बढ़ाने, घरेलू उत्पादन और रिन्यूएबलं एनर्जी पर जोर देने की जरूरत है।
यह भी पढ़ें- LPG Cylinder New Rules: अब 80% डिलीवरी पर ओटीपी अनिवार्य, नहीं तो एजेंसी की आपूर्ति रुक सकती है