Petrol Disel Price Update: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की संभावनाएं मजबूत होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। इस घटनाक्रम का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपना अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सीजफायर होता है और तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं या ओर गिरती हैं, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
अमेरिका-ईरान तनाव कम होने के संकेत मिलते ही ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 97.99 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जो दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में इसमें 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 2% गिरकर 92.91 डॉलर के इंट्राडे लो तक पहुंच गया।
हालांकि इससे पहले के सत्र में ब्रेट करीब 5% की तेजी के साथ 109.39 डॉलर पर बंद हुआ था, जबकि WTI 2% से ज्यादा बढ़कर 93.32 डॉलर पर बंद हुआ था। बाजार में राहत तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम की घोषणा की।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सीधे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर डालती है। जब कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब भी भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए थे। अब जब कीमतों में नरमी आ रही है, तो आम जनता को महंगाई से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
ट्रेडर्स और विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी सीजफायर होता है और तेल की आपूर्ति प्रभावित नहीं होती, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे प्रभावित होती हैं?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर रुपया विनिमय दर और सरकार की कर नीति पर निर्भर करती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने पर तेल कंपनियां आमतौर पर पेट्रोल और डीजल के दाम घटाती है, लेकिन अंतिम फैसला केंद्र और राज्य सरकारों की कर व्यवस्था पर भी निर्भर करता है।
वर्तमान में कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल पर वैट और अन्य टैक्स काफी अधिक हैं। यदि केंद्र और राज्य सरकारें टैक्स में कुछ राहत देती है, तो उपभोक्ताओं को ज्यादा फायदा हो सकता है।
अंतिम बात
अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर के संकेत से कच्चे तेल की कीमतों में 2% की गिरावट आई है। यह गिरावट भारत के लिए सकारात्मक संकेत है। यदि तनाव और कम होता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट की उम्मीद बढ़ जाएगी, जिससे आम जनता को महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है। अभी देखना यह होगा कि दोनों देशों के बीच बातचीत कितनी आगे बढ़ती है और भारत सरकार इस गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक कैसे पहुंचाती है।
यह भी पढ़ें- Toll Tax New Rules: 10% से ज्यादा ओवरलोड पर भरी जुर्माना, FASTag से वसूली, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला