Delhi CNG Price Hike: सीएनजी का रेट ₹86 प्रति किलो पहुंच गया है। रोजाना गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों की कमर टूट रही है। पहले ही कमाई मुश्किल थी, अब और दिक्कत बढ़ गई है।
ड्राइवरों की कहानी
एक ऑटो ड्राइवर ने बताया, “भाई, रोज 4-5 किलो सीएनजी लगती है। अब इतना महंगा हो गया तो कमाई का क्या बचेगा? बच्चों की फीस, घर का खर्चा, सब पर असर पड़ रहा है।”
दूसरे ने कहा, “सवारी कम मिल रही है। लोग अब महंगे किराए से बचने के लिए बस या बाइक का सहारा ले रहे हैं। हमारा रोज का खर्चा बढ़ गया, लेकिन आमदनी नहीं बढ़ी।”
कितना फर्क पड़ा
रिक्शा ड्राइवर बताते हैं कि पहले ₹300-400 में दिन कट जाता था। अब गैस भरने में ही इतना खर्च हो जाता है कि हाथ में कुछ नहीं बचता।
एक ड्राइवर ने गुस्से में कहा, “सरकार कहती है महंगाई कम होगी, लेकिन रोज कुछ न कुछ बढ़ रहा है। पेट्रोल, डीजल, अब सीएनजी। हम गरीब आदमी कहां से लाएं?”
ड्राइवरों की मांग
अहमदाबाद में हजारों ऑटो-रिक्शा ड्राइवर परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सीएनजी के दाम नहीं घटाए गए तो हड़ताल कर सकते हैं।
“हम 2 से 2.5 लाख रिक्शा ड्राइवर अहमदाबाद में हैं। पूरे गुजरात में 15 लाख। अगर हड़ताल हुई तो पूरा ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप हो जाएगा।”
सरकार से अपील
ड्राइवर सरकार से मांग कर रहे हैं कि सीएनजी पर सब्सिडी दी जाए या दाम कम किए जाएं।
“अडानी कंपनी तो हर रोज नया बिजनेस बढ़ा रही है। हवाई अड्डे खरीद रही है। लेकिन हम जैसे छोटे लोगों का क्या? हमें सस्ता सीएनजी चाहिए ताकि हम भी परिवार चला सकें।”
आम आदमी पर असर
सीएनजी महंगा होने से सिर्फ ड्राइवर ही नहीं, आम यात्री भी परेशान हैं।
- किराया बढ़ने की आशंका
- रोजाना सफर महंगा
- छोटे व्यापारियों और डिलीवरी वाले भी प्रभावित
क्या हो रहा है
ड्राइवरों ने शाम 5 बजे मीटिंग रखी है। वहां फैसला होगा कि आगे क्या करना है — विरोध प्रदर्शन, आवेदन या हड़ताल।
वे कह रहे हैं कि अगर सरकार नहीं सुनी तो पूरे गुजरात में रिक्शा हड़ताल हो सकती है।
ड्राइवर क्या कह रहे हैं
“हम 12 घंटे गाड़ी चलाते हैं। फिर भी हाथ में कुछ नहीं बचता। बच्चों को पढ़ाना है, घर चलाना है। सरकार को हमारे बारे में सोचना चाहिए।”
एक और ड्राइवर ने कहा, “पहले की सरकार में बेहतर था। अब हर चीज महंगी हो रही है। हमें तो सिर्फ गुजारा करना है।”
सरकार पर दबाव
ड्राइवरों की मांग है कि सीएनजी कंपनी और सरकार मिलकर कोई रास्ता निकालें। सब्सिडी दें या दाम कम करें।
“अगर सीएनजी सस्ता हुआ तो हम भी कम किराए में यात्रियों को ले जा सकेंगे। दोनों तरफ फायदा होगा।”
अभी की स्थिति
अभी ड्राइवर इंतजार कर रहे हैं। मीटिंग के बाद फैसला होगा। अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में अहमदाबाद और गुजरात के ट्रांसपोर्ट पर असर पड़ सकता है।
आम आदमी की परेशानी
सीएनजी महंगा होने से पूरा ट्रांसपोर्ट सिस्टम प्रभावित हो रहा है।
- ऑटो, रिक्शा, टैक्सी — सब महंगे
- रोजाना सफर का खर्च बढ़ा
- छोटे कारोबारियों पर बोझ
अंतिम बात
महंगाई का बोझ सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ रहा है जो रोज कमाकर गुजारा करते हैं। सरकार और कंपनियों को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए। ड्राइवरों की मांग जायज है — सस्ता सीएनजी और बेहतर आमदनी। अभी देखना होगा कि मीटिंग के बाद क्या फैसला होता है।
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