IRAN VS USA: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद भारतीय टैंकर ‘देश गरिमा’ स्ट्रेट ऑफ हरमुज से सुरक्षित निकलकर ओमान की खाड़ी में प्रवेश कर गया है। यह घटना भारत के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ हरमुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है।
यह जहाज कतर के रास लफान बंदरगाह से निकला था और युद्ध शुरू होने के बाद दसवां भारतीय जहाज है जो इस संवेदनशील क्षेत्र को पार करने में सफल रहा। युद्धविराम की घोषणा के बाद यह दूसरा भारतीय जहाज है।
स्ट्रेट ऑफ हरमुज की सामरिक अहमियत
स्ट्रेट ऑफ हरमुज गध्य पूर्व से यूरोप, अमेरिका और एशिया तक तेल निर्यात का मुख्य मार्ग है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई शिपिंग कंपनियां रुन्ट बदल रही हैं, जिससे समुद्री भाड़ा और बीमा प्रीमियम में भारी उछाल आया है।
कुछ दिनों पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा था कि युद्धविराम तक स्ट्रेट ऑफ हरमुज यातायात के लिए खुला रहेगा। लेकिन ईरानी सेना ने इसके कुछ घंटे बाद ही इस मार्ग को सखा सैन्य नियंत्रण में ले लिया। ईरान का आरोप है कि अमेरिका बार-बार उल्लंघन कर रहा है और समुद्री डकैती जैसा व्यवहार कर रहा है।
भारतीय नौसेना की भूमिका
भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में ऑपरेशन संकल्प के तहत अपने युद्धपोत तैनात कर रखे हैं। ये जहाज स्टेट ऑफ हरमुज से गुजरने वाले या भारत आने वाले मर्चेट जहाजों पर नजर रखते हैं। ओमान तट के पास एक भारतीय नौसेना का युद्धपोत लगातार स्थिति पर निगरानी रखे हुए है।
यह तैनाती भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारतीय कार्गो जहाजों को सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।
अंतिम बात
भारतीय टैंकर ‘देश गरिमा का स्ट्रेट ऑफ हरमुज से सुरक्षित निकलना मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सकारातमक संकेत है। भारतीय नौसेना की तैनाती और कूटनीतिक प्रयासों से भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, स्थिति अभी भी संवेदनशील है। अगर सीजफायर स्थायी होता है, तो भारत जैसे आयातक देशों को बड़ा फायदा हो सकता है। भारत सरकार वैकल्पिक रास्तों और पर्याप्त बफर स्टॉक के जरिए स्थिति को संभालने की तैयारी में है।