PM Modi Big Appeal: हर रोज 45 रुपये नहीं, अब पेट्रोल-डीजल बचाने का समय

Published On: May 11, 2026

हम सबको अब सच में कुछ कदम उठाने होंगे। पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल जितना कम कर सकें, उतना कम करें। इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा से ज्यादा अपनाएं।

शहरों में जहां मेट्रो है, वहां मेट्रो ही यूज करें। अगर कार लेनी पड़े तो कारपूलिंग करें, ज्यादा लोगों को साथ बिठाएं। सामान भेजना हो तो रेलवे गुड्स ट्रेन का इस्तेमाल करें। इलेक्ट्रिक रेलवे है, पेट्रोल-डीजल की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिनके पास इलेक्ट्रिक वाहन है, वे उसे रोजाना चलाएं।

पुरानी आदतों को फिर अपनाएं

कोरोना के समय हमने वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की आदत डाली थी। अब फिर से उसी तरफ लौटना होगा। जहां संभव हो, ऑफिस जाने की बजाय घर से काम करें। इससे पेट्रोल बचता है और समय भी।

विदेशी मुद्रा बचाना है जरूरी

दुनिया में पेट्रोल-डीजल पहले से कई गुना महंगा हो गया है। हमें विदेशी मुद्रा बचानी होगी। शादियां विदेश में करने, छुट्टियां विदेश घूमने जाने का चलन है। इस संकट के समय कम से कम एक साल के लिए इसे टाल दें। भारत में ही बहुत जगहें हैं। यहां घूमें, यहां खर्च करें।

सोने की खरीदारी भी कम करें। फंक्शन हो या कोई कार्यक्रम, इस साल सोने के गहने खरीदने से बचें। एक समय था जब संकट में लोग सोना दान करते थे। आज दान नहीं, लेकिन खरीदारी जरूर कम कर दें।

खेती और रोजमर्रा की चीजें

केमिकल खाद का इस्तेमाल घटाएं। 25-30-40% तक कम करें। नेचुरल फार्मिंग की तरफ बढ़ें। इससे धरती भी बचेगी और विदेशी मुद्रा भी।

खेतों में डीजल पंप की जगह सोलर पंप लगाएं। सरकार इस पर काम कर रही है।

रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजें — कैंची, कंघी, टूथपिक, बैग, जूते — देखें कितनी विदेशी हैं। नई चीजें खरीदते समय स्वदेशी को प्राथमिकता दें। Vocal for Local को सिर्फ दिवाली के दिए तक सीमित न रखें।

ये सबका दायित्व है

ये किसी एक दल, एक सरकार या एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं है। ये देश का मुद्दा है। हर नागरिक, हर राजनीतिक दल, हर संगठन को इसमें योगदान देना होगा।

मीडिया से भी अपील है कि वे इस अभियान को मजबूती से उठाएं।

छोटे प्रयास, बड़ा असर

हर परिवार अगर खाने के तेल का इस्तेमाल 10% कम कर दे तो भी देश की काफी मदद हो जाएगी। स्वास्थ्य भी सुधरेगा और विदेशी मुद्रा भी बचेगी।

हमारा देश आत्मनिर्भर बन रहा है। लेकिन कुछ जगहों पर हड़तालें, साजिशें और पुरानी सोच अभी भी रुकावट डाल रही हैं। हमें इनसे दूरी बनानी होगी।

समय की मांग है

आज का संकट हमें चुनौती दे रहा है। लेकिन ये चुनौती हमें मजबूत भी बनाएगी। अगर हर नागरिक थोड़ा-थोड़ा योगदान देगा तो हम इस संकट से न सिर्फ निकलेंगे, बल्कि और मजबूत होकर निकलेंगे।

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Ashutosh Behera

I am Ashutosh, graduate complete in electrical engineering. i am staying in Jagatsinghpur, Odisha, belong in village, this is my website.

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