UP Electricity Crisis: 2138 MW रिकॉर्ड खपत, कर्मचारियों की छुट्टी रद्द, जनता बेहाल

Published On: May 22, 2026

UP Electricity Crisis: मई की भयंकर गर्मी में उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। रात भर बिजली गायब रहती है। लोग पंखे के बिना पसीने में तर होते रहते हैं। अब उनका गुस्सा फूट पड़ा है।

लखनऊ में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े हुए हैं। नाराज लोग बिजली उपकेंद्रों पर पहुंच गए। अपट्रोन उपकेंद्र पर तो पथराव तक हो गया। रानीगंज और आसपास के इलाकों में पूरी रात बिजली नहीं आई। लोगों ने चक्का जाम किया और उपकेंद्रों को बंद करा दिया।

गुस्सा क्यों फूटा?

मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर है। पूरे प्रदेश में बिजली की मांग क्षमता से 2 करोड़ किलोवाट ज्यादा है। 20 मई को सिर्फ लखनऊ में 2138 मेगावाट की रिकॉर्ड खपत दर्ज हुई। इतनी ज्यादा मांग आमतौर पर जून में होती थी। इस बार मई में ही आ गई।

वाराणसी में 4-5 घंटे की कटौती हो रही है। दिन में 65-90 बार ट्रिपिंग होती है। प्रयागराज में भी 4 से 7 घंटे बिजली गायब रहती है। औद्योगिक इलाकों में हालत और खराब है।

लोगों की परेशानी

गर्मी पहले से सताए जा रही है। ऊपर से बिजली नहीं। बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। कई परिवार रात भर जागते रहते हैं। सुबह होते ही बिजली उपकेंद्रों पर भीड़ लग जाती है।

विधायकों ने उठाई आवाज

भाजपा विधायक डॉ. नीरज बोरा और डॉ. राजेश्वर सिंह ने ऊर्जा मंत्री को चिट्ठी लिखी। सपा विधायक अरमान खान तो ताल कटोरा उपकेंद्र के अंदर धरने पर बैठ गए। जनप्रतिनिधि अब सीधे मैदान में हैं।

विभाग की तैयारी

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी रिया केजरीवाल ने बड़ा फैसला लिया। 31 जुलाई 2026 तक सभी कर्मचारियों और इंजीनियरों की छुट्टी रद्द कर दी गई है। जो लोग पहले से छुट्टी पर थे, उन्हें तुरंत वापस बुला लिया गया।

असल समस्या क्या है

बिजली विभाग की क्षमता मांग से काफी कम है। जितना लोड कनेक्शन लिया गया है, उसके हिसाब से सिस्टम तैयार नहीं है। नतीजा — हर बढ़ती मांग पर कटौती।

लोग क्या कर रहे हैं

कई जगहों पर चक्का जाम हो रहा है। उपकेंद्रों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। पुलिस को स्थिति संभालनी पड़ रही है। लेकिन समस्या जड़ से जुड़ी है, इसलिए तुरंत राहत मिलती नहीं दिख रही।

आपके लिए सलाह

  • घर में इन्वर्टर या सोलर बैकअप की व्यवस्था कर लो।
  • बिजली बचाने की कोशिश करो।
  • अनावश्यक उपकरण बंद रखो।
  • अपने इलाके के उपकेंद्र पर शिकायत दर्ज कराओ।

क्या कुछ सुधरेगा?

विभाग ने कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द करके कुछ राहत देने की कोशिश की है। लेकिन असली समाधान तब तक नहीं आएगा जब तक क्षमता नहीं बढ़ाई जाएगी। अभी गर्मी और बढ़ने वाली है। अगर मांग और बढ़ी तो हालात और खराब हो सकते हैं। लोग पहले से ही बेहाल हैं।

अंत में

ये सिर्फ बिजली का संकट नहीं है। ये लोगों की सहनशक्ति की परीक्षा है। गर्मी, बिजली कटौती और रोजमर्रा की जिंदगी — तीनों एक साथ सता रहे हैं। सरकार और विभाग को अब ठोस कदम उठाने होंगे। वरना गुस्सा और बढ़ेगा।

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Ashutosh Behera

I am Ashutosh, graduate complete in electrical engineering. i am staying in Jagatsinghpur, Odisha, belong in village, this is my website.

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