Zorawar Light Tank: 2020 में लद्दाख में जो कुछ हुआ, उसने भारतीय सेना को सोचने पर मजबूर कर दिया। चीन के Type 15 टैंक ने पहाड़ी इलाकों में अपनी ताकत दिखाई। जवाब में भारत ने अपना खुद का लाइट टैंक बनाया। नाम रखा Zorawar। जनरल Zorawar Singh के नाम पर।
क्या खास है इस टैंक में
25 टन वजन। हल्का, लेकिन दमदार। 105 mm राइफल गन ऑटो लोडर के साथ। 7.62 mm मशीन गन। 12.7 mm रिमोट कंट्रोल वेपन स्टेशन। और Nag Mk2 एंटी टैंक मिसाइल लॉन्चर।
इंजन Cummins 760 HP। इसे 1000 HP तक अपग्रेड करने की योजना।
70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार। 450 किलोमीटर तक रेंज।
क्यों बनाया गया Zorawar
लद्दाख की ऊंचाई पर भारी टैंक ले जाना मुश्किल। ऑक्सीजन कम, रास्ते खतरनाक। Zorawar को इसी के लिए तैयार किया गया। 4200 मीटर ऊंचाई पर Nyoma में टेस्टिंग हुई। फायरिंग, गतिशीलता, सुरक्षा – सब चेक किया गया।
सेना ने पहले 59 टैंक का ऑर्डर दिया। कुल 7 रेजिमेंट बनाने का प्लान। यानी 354 से ज्यादा टैंक।
समय कितना लगा
मात्र 19 महीने में तैयार। DRDO और L&T ने मिलकर काम किया। स्वदेशी टेक्नोलॉजी का बड़ा उदाहरण।
2027 में सेना में शामिल हो सकता है
अभी प्रोटोटाइप टेस्टिंग चल रही है। 2027 तक यूनिट्स में पहुंचने की उम्मीद।
क्यों जरूरी है यह टैंक
पहाड़ी युद्ध में हल्के टैंक की जरूरत लंबे समय से थी। 1948 में Stuart टैंक, 1962 में AMX-13, 1965 में फिर AMX-13। Zorawar अब आधुनिक वर्जन है।
तुम्हें क्यों जानना चाहिए
अगर तुम रक्षा क्षेत्र में दिलचस्पी रखते हो तो यह टैंक भारत की सोच को दिखाता है। हम अब सिर्फ खरीदते नहीं, खुद बनाते हैं।
अभी क्या हो रहा है
टेस्टिंग जारी। आर्मी फीडबैक ले रही है। डिजाइन को और बेहतर बनाने की कोशिश।
अंत में
Zorawar सिर्फ एक टैंक नहीं। यह संदेश है कि भारत अब अपनी जरूरत खुद पूरी कर सकता है। 2020 का सबक याद रखते हुए हमने जो कदम उठाया, वह सही दिशा में है।
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