आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चा गरम है। लेकिन असली बहस NPS, UPS और OPS को लेकर चल रही है। लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स इस दुविधा में हैं कि उनका भविष्य आखिर किस स्कीम में सुरक्षित रहेगा।
ऑल इंडिया रेलवेmen’s फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने इस मुद्दे पर साफ और बेबाक बयान दिया है।
शिव गोपाल मिश्रा का बड़ा बयान
मिश्रा कहते हैं कि कर्मचारियों की पहली पसंद आज भी पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) ही है।
एनपीएस (नई पेंशन स्कीम) को लेकर उनका कहना है कि कर्मचारियों का डर बिल्कुल जायज है। कई नौजवान कर्मचारी उनके पास आकर बताते हैं कि साल भर में 12,000 रुपये कटे, लेकिन रिटर्न सिर्फ 3,000 रुपये आया। बाजार के उतार-चढ़ाव, यूक्रेन-रूस युद्ध या मिडिल ईस्ट का तनाव — हर घटना का सीधा असर पेंशन पर पड़ता है।
“हम शुरू से कहते आए हैं कि कर्मचारियों को बाजार के हवाले नहीं छोड़ना चाहिए। खासकर पुराने और अनुभवी कर्मचारियों में अब रिस्क लेने की क्षमता नहीं बची है।”
UPS क्या है और OPS क्यों जरूरी
जब OPS की मांग पर सरकार नहीं मानी तो यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (UPS) सामने आई। इसमें 50% गारंटीड पेंशन का प्रावधान है। मिश्रा इसे राहत मानते हैं, लेकिन मंजिल नहीं।
उनका कहना है कि जब हमने देखा कि एनपीएस में कर्मचारी 800, 1200 या 1600 रुपये की पेंशन लेकर रिटायर हो रहे हैं तो हमें उनके भविष्य की चिंता हुई।
“हम अपने बच्चों को सड़क पर भीख मांगते नहीं देख सकते थे।”
ब्यूरोक्रेसी 40-45% से आगे नहीं बढ़ रही थी। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद 50% गारंटीड पेंशन का रास्ता खुला।
आठवें वेतन आयोग में क्या मांग की गई
AIRF ने अपने मेमोरेंडम में साफ-साफ लिखा है कि सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में लाया जाए।
नौजवानों की भावना भी यही है कि उन्हें कंट्रीब्यूटरी पेंशन (एनपीएस) के बजाय डिफाइंड बेनिफिट पेंशन (OPS) मिलनी चाहिए।
हालांकि पे कमीशन के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में पेंशन का मुद्दा सीधे शामिल नहीं है, लेकिन पिछली बार जस्टिस माथुर कमीशन ने भी कर्मचारियों के गुस्से को स्वीकार किया था। AIRF अब कोशिश कर रहा है कि आठवां वेतन आयोग अपनी सिफारिशों में OPS को शामिल करे।
कर्मचारियों की नाराजगी क्यों
एनपीएस में पेंशन बाजार पर निर्भर है। अच्छा बाजार हो तो ठीक, लेकिन मंदी में पेंशन बुरी तरह प्रभावित होती है। पुराने कर्मचारियों को ये रिस्क बर्दाश्त नहीं।
दूसरी तरफ OPS में पेंशन फिक्स्ड और गारंटीड होती है। यही वजह है कि ज्यादातर कर्मचारी OPS की वापसी चाहते हैं।
यूपीएस एक समझौता है
शिव गोपाल मिश्रा UPS को बीच का रास्ता मानते हैं। 50% गारंटीड पेंशन मिल रही है, जो एनपीएस से बेहतर है। लेकिन OPS जितना भरोसेमंद नहीं।
वे कहते हैं कि अगर सरकार OPS बहाल कर दे तो कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
क्या है आगे का रास्ता
AIRF समेत कई कर्मचारी संगठन लगातार OPS की मांग कर रहे हैं। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें आने वाली हैं। कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि कमीशन इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं करेगा।
मिश्रा का साफ संदेश है — कर्मचारियों को बाजार के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उनकी सेवा पूरी होने के बाद उन्हें सम्मानजनक पेंशन मिलनी चाहिए।
आम कर्मचारी क्या सोच रहे हैं
बहुत से युवा कर्मचारी एनपीएस से परेशान हैं क्योंकि उनका पैसा शेयर मार्केट में लगा है। छोटी-मोटी मंदी में उनका फ्यूचर अनिश्चित हो जाता है।
पुराने कर्मचारी तो OPS की वापसी चाहते ही हैं। वे कहते हैं कि हमने पूरा जीवन सरकार की सेवा में लगाया, आखिरी दिनों में बाजार के जोखिम क्यों झेलें।
अंतिम बात
OPS, UPS या NPS — बहस जारी है। लेकिन कर्मचारियों की पहली मांग साफ है — सुरक्षित और गारंटीड पेंशन। शिव गोपाल मिश्रा जैसे नेता लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। अब आठवें वेतन आयोग पर सबकी नजर है। अगर कमीशन OPS या UPS जैसा मजबूत विकल्प देता है तो लाखों कर्मचारियों को राहत मिलेगी। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत जारी है। आने वाले दिनों में इस पर और अपडेट्स आ सकते हैं। जो कर्मचारी इस मुद्दे पर नजर रखे हुए हैं, वे अपने संगठनों से जुड़े रहें और आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखें।
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