Women Reservation Bill: लोकसभा में महिला आरक्षण संबंधी 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक गिर जाने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार सरकार अब कई नए विकल्पों पर काम कर रही है, जिनके जरिए महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जा सकेगा। यह विधेयक गिरने का मतलब यह नहीं है कि महिलाओं का 33% आरक्षण का सपना खत्म हो गया है। सरकार इसे किसी भी कीमत पर लागू करने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रही है।
131वां संविधान संशोधन विधेयक क्या था?
यह विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन पास नहीं हो सका। अगर यह पास हो जाता, तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित हो जातीं।सरकार अब मानसून सत्र में नया विधेयक ला सकती है या मौजूदा विधेयक में संशोधन कर आगे बढ़ सकती है। साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों और परिसीमन से जुड़े दो अन्य विधेयक अभी भी लोकसभा में लंबित हैं, जिन्हें सरकार कभी भी मतदान के लिए पेश कर सकती है।
सरकार के पास क्या विकल्प हैं?
- लोकसभा सीटें बढ़ाना
सरकार की योजना लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 800 से 850 करने की थी। इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। दक्षिण के राज्य जैसे तमिलनाडु और केरल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन का विरोध कर रहे थे, क्योंकि इससे उनका प्रतिनिधित्व कमजोर हो सकता था। अगर सरकार विपक्ष से बातचीत करके सहमति बनाती है, तो यह विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है। - निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदलना
सरकार मौजूदा 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदल सकती है। इसमें राजनीतिक सहमति बनाना 상대ा आसान हो सकता है और विपक्ष का सहयोग मिलने की संभावना बढ़ जाती है। - आरक्षण को परिसीमन से अलग करना
संविधान के अनुच्छेद 334A में बदलाव करके आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की शर्त से अलग किया जा सकता है। यानी मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण लागू किया जा सकता है। यह विकल्प सबसे आंसान और व्यावहारिक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें विपक्ष से सहमति बनाना अपेक्षाकृत सरत हो सकता है।
2029 चुनाव में 33% आरक्षण की संभावना
जनगणना चल रही है। उम्मीद है कि 2027 तक यह पूरी हो जाएगी। उसके बाद परिसीमन आयोग बनेगा। अगर सब कुछ समय पर हुआ, तो 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल सकता है। इस स्थिति में संसद में करीब 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिए एक ऐतिहासिक कदम होगा।
अंतिम बात
महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार सीटें बढ़ाने, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदलने या आरक्षण को परिसीमन से अलग करने जैसे विकल्पों पर काम कर रही है।
2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33% आरक्षण यानी लगभग 181 सीटें मिलने की संभावना है। यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई दिशा देगा। सरकार विपक्ष को घेरने के लिए राजनीतिक रणनीति भी तैयार कर रही है। कुल मिलाकर महिला आरक्षण का मुद्दा अभी भी जीवित है और सरकार इसे लागू करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
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