
1 जुलाई से गांवों में रोजगार की तस्वीर बदलने वाली है, क्योंकि एक योजना लगू हो रही है। नाम है विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन। लोग इसे VB-G RAM G 2025 कह रहे हैं।
पुरानी मनरेगा अब नहीं रही है, उसकी जगह यह नई व्यवस्था आएगी। हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन काम की गारंटी। पहले 100 दिन थे, अब ओर 25 दिन बढ़ गए।
जिला अधिकारियों ने बताया कि काम ऐसे चुनेंगे जो गांव को लंबे समय तक फायदा दें। सिर्फ आज का नहीं, कल का भी।
कैसे काम होंगे?
जल संरक्षण के प्रोजेक्ट में तालाब खुदवाना, चेकडैम बनाना। पानी रुकेगा तो फसलें बेहतर होंगी। सूखे में भी कुछ राहत मिलेगी।
ग्रामीण सड़कें, छोटे पुल, सामुदायिक भवन। रोजमर्रा की जिंदगी आसान बने। आजीविका वाले काम जैसे, मुर्गी पालन, सब्जी उत्पादन, छोटी दुकानें, जहां से महिलाएं या युवा अतिरिक्त कमाई कर सकें।
जलवायु परिवर्तन से बचाव के लिए पेड़ लगाना, मिट्टी संरक्षण। बाढ़ वाले इलाकों में दीवारें या ड्रेनेज।
काम कैसे मिलेगा?
मजदूर काम मांगेगा। 15 दिन के अंदर काम नहीं मिला तो बेरोजगारी भत्ता देना पड़ेगा। यह प्रावधान सख्ती से लागू होगा।
मजदूरी फिलहाल पुरानी दर पर। केंद्र नई तय करे तब बदलाव।
क्यों बदला गया पुराना सिस्टम?
मनरेगा ने 20 साल में बहुत काम किया। लेकिन कमियां भी थीं। फर्जीवाड़ा, देरी, मौसम से टकराव।
नई योजना इनको ठीक करने की कोशिश है। 125 दिन, बेहतर प्लानिंग, ज्यादा लोकल कंट्रोल।
पंचायतों की भूमिका बढ़ी
पंचायतें अब सिर्फ काम कराने वाली नहीं, वे प्लान बनाएंगी। लोकल जरूरत समझेंगी। बाहर से थोपी गई स्कीम नहीं चलेगी।
चक्रीय अर्थव्यवस्था पर जोर। गांव के संसाधन गांव में ही घूमें। कचरा प्रबंधन, खाद बनाना, पानी का दोबारा इस्तेमाल।
खेती का मौसम सुरक्षित
खेती सबसे बड़ी आजीविका है, गांव में। बुनाई और कटाई के वक्त काम बंद रहेंगे। सरकार हर साल 60 दिन का पीरियड बताएगी।
किसान को परेशानी न हो। मजदूर भी खेतों में मदद कर सकें। दोनों पक्ष संतुलित।
पैसे का बंटवारा
कुल खर्च में 60 प्रतिशत केंद्र देगा और कुछ 40 प्रतिशत राज्य। बिहार के लिए केंद्र ने 6715 करोड़ के आसपास रखा है। राज्य अपना हिस्सा जोड़ेगा।
तकनीक से पारदर्शिता
बायोमेट्रिक अटेंडेंस। उंगली लगाओ, हाजिरी दर्ज। फर्जी नामों पर रोक। साप्ताहिक भुगतान। काम खत्म होते ही हफ्ते में पैसे अकाउंट में।
डिजिटल मॉनिटरिंग। अधिकारी कहीं से भी चेक कर सकें। काम सही जगह हो रहा है या नहीं। सोशल ऑडिट। गांव के लोग खुद जांच करेंगे। जवाबदेही बढ़ेगी।
गांव की जिंदगी पर असर
कल्पना करो। रामजी का परिवार। पहले 80-90 दिन काम मिलता था। अब 125 का वादा। कुछ extra पैसे से बच्चों की स्कूल फीस, दवाई, या घर की छत ठीक करवा लेंगे।
महिलाएं ज्यादा बाहर निकलेंगी। जीविका दीदियों को खास फोकस। युवा गांव में ही कुछ कर सकेंगे। पलायन थोड़ा रुकेगा।
अमल पर नजर
1 जुलाई 2026, आज से शुरू। शुरुआती महीनों में गड़बड़ हो सकती है। नया सिस्टम सेट होने में समय लगेगा।
लेकिन दिशा सही लगती है। गांवों को मजबूत बनाने की कोशिश।
कुछ उदाहरण
सिवान जिले में तालाब खुदाई का काम। पहले मनरेगा में होता था। अब ज्यादा दिन मिलेंगे। पानी भरेगा तो मछली पालन भी शुरू हो सकता है।
मधुबनी में सड़क निर्माण। महिलाओं की टीम काम करेगी। स्किल ट्रेनिंग भी जुड़ेगी। पूर्णिया के बाढ़ प्रभावित इलाके। ड्रेनेज प्रोजेक्ट। साल भर पानी की समस्या कम हो।
बड़े लक्ष्य
विकसित भारत 2047। गांव बिना मजबूत देश नहीं बन सकता।
यह योजना उस दिशा में एक कदम। रोजगार, पानी, इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका – सब साथ।
लोग क्या कह रहे हैं?
गांव के बुजुर्ग बोले, “काम तो मिले, पैसे समय पर मिलें। बाकी देख लेंगे।”
महिला मजदूर, “125 दिन अच्छा है। लेकिन खेती के मौसम में छुट्टी मिलना जरूरी।”
युवा, “अगर स्किल ट्रेनिंग जुड़ी तो और बेहतर। सिर्फ खुदाई नहीं।”
विस्तार से समझें योजना के फायदे
125 दिन का मतलब औसतन हर हफ्ते 2-3 दिन काम। परिवार को नियमित आय। पानी संरक्षण से फसल उत्पादन बढ़ सकता है। एक तालाब कई परिवारों को फायदा।
आजीविका प्रोजेक्ट्स से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। आत्मनिर्भरता। पंचायत मजबूत हुई तो लोकल समस्याएं तेजी से सुलझेंगी।
संभावित नुकसान या सावधानियां
फर्जीवाड़ा पूरी तरह खत्म नहीं होगा। लेकिन बायोमेट्रिक से कम जरूर। कुछ इलाकों में काम की मांग ज्यादा। 125 दिन पर्याप्त न पड़े।
राज्य सरकार को अपना 40 प्रतिशत समय पर देना होगा।
चुनौतियां साफ हैं
बजट पहले से फिक्स। मांग ज्यादा हुई तो दिक्कत। बिहार में बेरोजगारी ऊंची है। पंचायतों को ट्रेनिंग चाहिए। स्टाफ कमजोर तो प्लान अच्छा भी बेकार।
मॉनिटरिंग सिस्टम सही चले। नहीं तो पुरानी समस्याएं लौट आएंगी।
तैयारियां कैसी ?
बिहार रूरल डेवलपमेंट विभाग सक्रिय। जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश। पंचायत सचिवों को मीटिंग।
सॉफ्टवेयर अपडेट। वर्कर्स को रजिस्ट्रेशन।
अंतिम बात
नई शुरुआत है। उम्मीद है कि गांवों में सकारात्मक बदलाव आए। काम सही जगह हो, पैसे सही हाथ पहुंचें। यही सबसे जरूरी।
125 दिन सिर्फ नंबर नहीं। परिवारों की जिंदगी में थोड़ी स्थिरता। देखते हैं आगे क्या होता है।
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