
अपडेट: 4 जुलाई 2026
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था मौसम पर अत्यधिक निर्भर है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में इन दिनों मॉनसून की बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को भारी नुकसान की आशंका बनी हुई है। खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, बाजरा, दालें और सब्जियों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। ऐसे में किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) एक बड़ी राहत और सुरक्षा कवच साबित हो रही है।
यह योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जो 2016 में शुरू हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल नुकसान से होने वाले आर्थिक झटके से बचाना और उनकी आय को स्थिर रखना है। मौजूदा समय में फसल बीमा माह (1 जुलाई से 31 जुलाई) चल रहा है, जिसमें सरकार किसानों को जागरूक करने और अधिक से अधिक पंजीकरण कराने पर जोर दे रही है। सारे जानकारी सरकार की X पोस्ट से ली गई है। (आपको नीचे मिलेगा)
योजना का इतिहास और महत्व
पहले नेशनल एग्रीकल्चरल इंश्योरेंस स्कीम (NAIS) और मॉडिफाइड NAIS जैसी योजनाएं चल रही थीं, लेकिन उनमें कई कमियां थीं जैसे देरी से क्लेम सेटलमेंट, उच्च प्रीमियम और सीमित कवरेज। इन कमियों को दूर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 18 फरवरी 2016 को PMFBY की शुरुआत की। यह “एक राष्ट्र-एक योजना” के सिद्धांत पर आधारित है।
योजना के तहत किसान बहुत कम प्रीमियम देकर अपनी फसल का बीमा करा सकते हैं:
- खरीफ फसलें: 2% प्रीमियम
- रबी फसलें: 1.5% प्रीमियम
- वार्षिक वाणिज्यिक/बागानी फसलें: 5% प्रीमियम
बाकी प्रीमियम का बोझ केंद्र और राज्य सरकारें बराबर बांटती हैं (कुछ राज्यों में केंद्र का हिस्सा ज्यादा)। इससे किसानों पर बोझ कम पड़ता है।
उत्तर प्रदेश में लाखों किसान इस योजना से जुड़े हुए हैं। हाल ही में UP सरकार ने खरीफ 2025 और रबी 2025-26 के नुकसान के लिए 122.28 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ट्रांसफर किए। यह योजना न केवल फसल नुकसान की भरपाई करती है बल्कि किसानों को आधुनिक खेती अपनाने और ऋण लेने के लिए प्रोत्साहित भी करती है।
किन जोखिमों से सुरक्षा?
PMFBY फसलों को व्यापक कवरेज देती है:
- प्राकृतिक आपदाएं: सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान, भूस्खलन, जंगल की आग।
- कीट और रोग: फसल पर लगने वाले कीड़े-मकोड़े और बीमारियां।
- स्थानीय आपदाएं: छोटे क्षेत्र में होने वाली घटनाएं।
- कटाई के बाद: 14 दिनों तक खेत में सुखाते समय बारिश या तूफान से नुकसान।
- 2026 अपडेट: खरीफ 2026 से जंगली जानवरों (हाथी, सूअर, बंदर आदि) के हमले से होने वाले नुकसान का कवरेज भी शामिल।
पिछले वर्षों में करोड़ों किसानों को क्लेम मिल चुके हैं। योजना शुरू होने से अब तक 37 करोड़ से ज्यादा आवेदन आए और 12 करोड़ से अधिक किसानों को क्लेम वितरित किए गए।
उत्तर प्रदेश में स्थिति
UP में बारिश और तूफान से धान, गेहूं, आलू आदि फसलों को नुकसान हो रहा है। सरकार ने सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाए हैं। CSC केंद्रों, बैंक शाखाओं और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आसानी से पंजीकरण हो रहा है। किसान भाई समय रहते बीमा करा लें ताकि नुकसान होने पर तुरंत मुआवजा मिल सके।
जरूरी दस्तावेज
बीमा कराने के लिए निम्नलिखित दस्तावेज तैयार रखें:
- आधार कार्ड (अनिवार्य) या अन्य वैध पहचान पत्र (वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस आदि)।
- बैंक पासबुक, खाता संख्या और IFSC कोड।
- मोबाइल नंबर (OTP वेरिफिकेशन के लिए)।
- भूमि रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी, पट्टा, लैंड पजेशन सर्टिफिकेट)।
- बोई गई फसल का विवरण (क्षेत्रफल, फसल का प्रकार)।
- पासपोर्ट साइज फोटो (यदि जरूरी)।
- किराएदार/बटाईदार किसान के लिए राज्य नियमों अनुसार अतिरिक्त दस्तावेज।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step)
step1 :पोर्टल पर जाएं: https://www.pmfby.gov.in/ खोलें। Farmer Corner में Enroll Now चुनें।
step 2:रजिस्ट्रेशन: राज्य, सीजन, वर्ष चुनें। मोबाइल नंबर से OTP वेरिफाई करें। व्यक्तिगत जानकारी, पता, पहचान पत्र और बैंक डिटेल भरें।
step 3:लॉगिन: रजिस्ट्रेशन के बाद मोबाइल/OTP से लॉगिन करें। (कुछ राज्यों जैसे UP में राज्य पोर्टल भी उपलब्ध)।
step 4:फसल विवरण भरें: भूमि, फसल, क्षेत्रफल आदि डालें। दस्तावेज अपलोड करें।
step 5:प्रीमियम भुगतान: ऑनलाइन पेमेंट करें। सफलता पर रसीद और आवेदन नंबर डाउनलोड/सुरक्षित रखें।
step 6:ऑफलाइन विकल्प: CSC केंद्र, बैंक शाखा या बीमा कंपनी के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन के बाद क्या करें?
- आवेदन नंबर सुरक्षित रखें।
- पोर्टल पर स्टेटस चेक करते रहें।
- नुकसान होने पर Krishi Rakshak Portal या हेल्पलाइन 14447 पर सूचना दें (72 घंटे के अंदर जियो-टैग्ड फोटो के साथ)।
- क्लेम प्रोसेसिंग के बाद राशि सीधे बैंक खाते में आ जाती है।
योजना के लाभ
- कम प्रीमियम: किसान सिर्फ 1.5-5% ही देते हैं।
- व्यापक कवरेज: प्री-सोइंग से पोस्ट-हार्वेस्ट तक।
- तेज क्लेम: डिजिटल टेक्नोलॉजी (सैटेलाइट, ड्रोन, ऐप) से तेज आकलन।
- महिलाओं और छोटे किसानों को प्राथमिकता: कई राज्यों में विशेष कैंप।
- आर्थिक स्थिरता: नुकसान होने पर भी किसान अगले सीजन की तैयारी कर सकते हैं।
- कृषि ऋण को बढ़ावा: बीमा होने से बैंक आसानी से लोन देते हैं।
पिछले वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि योजना ने लाखों किसानों को दिवालिया होने से बचाया है। UP जैसे बड़े कृषि राज्य में यह और भी प्रभावी साबित हो रही है।
🌾 फसल बीमा माह | 1–31 जुलाई
— Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (@pmfby) July 2, 2026
किसानों को फसल बीमा के प्रति जागरूक करने और अधिक से अधिक किसानों तक योजना का लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से 1–31 जुलाई तक पूरे देश में 'फसल बीमा माह' मनाया जा रहा है।
खेती प्राकृतिक आपदाओं और अन्य जोखिमों से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में समय पर फसल बीमा… pic.twitter.com/gNvAWFvV87
चुनौतियां और सुधार
कुछ चुनौतियां जैसे जागरूकता की कमी, दस्तावेजी प्रक्रिया में देरी, एंटी-सेलेक्शन (जोखिम वाले क्षेत्रों में ज्यादा आवेदन) आदि हैं। सरकार 2023 के ऑपरेशनल गाइडलाइंस में सुधार कर रही है। डिजिटल इंडिया के तहत CSC और मोबाइल ऐप से प्रक्रिया आसान हुई है।
किसानों से अपील
बारिश-तूफान का मौसम चल रहा है। समय रहते अपनी फसल का बीमा जरूर कराएं। छोटे-मोटे किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। जागरूकता अभियान में भाग लें, CSC केंद्रों पर जाएं या ऑनलाइन पोर्टल चेक करें।
संपर्क: हेल्पलाइन 14447, व्हाट्सएप चैटबॉट 7065514447।
यह योजना न केवल फसल सुरक्षा बल्कि किसान आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार की इस पहल से देश के किसान मजबूत हो रहे हैं और कृषि क्षेत्र मजबूत हो रहा है।
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