ओडिशा सरकार की ज्ञानोदय-शिक्षा समृद्धि योजना: KG से PG तक मुफ्त शिक्षा का नया युग

Published On: जुलाई 5, 2026
ओडिशा सरकार की ज्ञानोदय-शिक्षा समृद्धि योजना
ओडिशा सरकार की ज्ञानोदय-शिक्षा समृद्धि योजना (Credit: Image Search)

अपडेट: 5 जुलाई 2026

KG से PG तक मुफ्त शिक्षा। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में। 2026-27 सेशन से लागू।

मोहन चरण माझी की कैबिनेट ने पास किया। 12 प्रस्तावों में यह सबसे बड़ा था।

पहले KG से आठवीं तक फ्री चल रहा था। अब नौवीं से आगे भी। एडमिशन फीस, नामांकन शुल्क सब खत्म। सिर्फ रेगुलर कोर्स पढ़ने वालों के लिए। प्रोफेशनल या सेल्फ फाइनेंसिंग वाले बाहर।

32 लाख से ज्यादा छात्र हर साल कवर होंगे।

सरकार कह रही है आर्थिक परेशानी अब पढ़ाई बीच में नहीं रोकेगी। परिवारों पर बोझ कम। ड्रॉपआउट घटेगा। दाखिले बढ़ेंगे।

पहले साल 895 करोड़। पांच साल में 5467 करोड़। शिक्षा पर अब तक का सबसे बड़ा निवेश।

माझी ने बोला यह सिर्फ फीस माफी नहीं। हर बच्चे को बराबर मौका। आर्थिक हालत चाहे जो भी हो। परिवार मजबूत होंगे। समृद्ध ओडिशा बनेगा।

ग्रामीण इलाकों में हालत अलग है। वहां कई बच्चे 10वीं के बाद छूट जाते थे। फीस, किताबें, बस का खर्च – सब जमा हो जाता था। अब उम्मीद है वह सिलसिला रुकेगा।

लड़कियां खास तौर पर फायदा लेंगी। आदिवासी इलाकों के बच्चे भी। कमजोर परिवारों को राहत मिलेगी। यह सारे जानकारी ऑफिशियल ‘ X’ पोस्ट से लाया गया है। (जो आपको नीचे मिलेगा)

फिर भी कुछ सवाल बाकी हैं

स्कूलों में जगह है? टीचर पर्याप्त हैं? ज्यादा बच्चे आएंगे तो क्या होगा। लैब, लाइब्रेरी, क्लासरूम — सब पर दबाव पड़ेगा।

बजट पास हो गया। लेकिन खर्च सही जगह लगे, यही मायने रखता है।

मुझे लगता है योजना अच्छी है। लेकिन फ्री करना एक तरफ। पढ़ाई की क्वालिटी दूसरी तरफ। दोनों साथ चले तो असर दिखेगा।

ओडिशा में साक्षरता पहले से बेहतर हो रही है। इस कदम से और तेजी आएगी। युवा स्किल्ड बनेंगे। नौकरियां आसान होंगी।

कैसे काम करेगी यह योजना?

सरकारी स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक। सरकारी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में UG और PG। सहायता प्राप्त संस्थान भी शामिल।

सिर्फ रेगुलर स्ट्रीम। डिस्टेंस या प्राइवेट मोड नहीं।

हर साल 32 लाख। मतलब हर क्लास में हजारों बच्चे। कुल मिलाकर बड़ा नंबर।

माझी ने पहले घोषणा की थी। कैबिनेट ने अब औपचारिक मंजूरी दी।

यह फैसला सुनिश्चित करेगा कोई बच्चा पैसे की वजह से पढ़ाई न छोड़े।

सरकार की जिम्मेदारी बढ़ गई है

सिर्फ फीस माफ नहीं। टीचर ट्रेनिंग, नई किताबें, डिजिटल क्लास — सब जरूरी।

अगर ढांचा तैयार नहीं तो योजना कागजों तक सीमित रह जाएगी।

32 लाख छात्र। पांच साल का बजट। नतीजे आने चाहिए।

क्या असर पड़ेगा?

पढ़े लिखे युवा ज्यादा होंगे। राज्य की अर्थव्यवस्था को फायदा। किसान परिवार की बेटी अब बिना रुके बीए या बीएससी कर सकेगी। पहले वह फीस सोचकर घर बैठ जाती। अब वह आगे बढ़ेगी।

ड्रॉपआउट दर घंटेगी। खासकर 10वीं के बाद। सरकारी आंकड़े पहले से दिखाते हैं कि फीस एक बड़ी वजह है। इस दीवार के हटने से हजारों बच्चे स्कूल में बने रहेंगे।

उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ेगा। सरकारी कॉलेजों में सीटें भरेंगी। लड़के-लड़कियां दोनों। इससे राज्य में कुल साक्षरता दर और ऊपर जाएगी।

रोजगार के मौके भी बेहतर होंगे। पढ़ा लिखा युवा बेहतर जॉब पाएगा। छोटे शहरों और गांवों में स्किल्ड लोग बढ़ेंगे। लोकल इकोनॉमी को सपोर्ट मिलेगा।

परिवारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। मां-बाप चिंता किए बिना बच्चों को पढ़ा सकेंगे। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग में।

आदिवासी इलाकों में बदलाव दिख सकता है। वहां शिक्षा पहुंचने में देरी होती थी। अब और बच्चे कॉलेज तक पहुंचेंगे।

एक उदाहरण

मान लो कोई किसान परिवार। बेटी 10वीं पास कर रही है। पहले फीस सोचकर चिंता होती। अब आसानी से आगे पढ़ सकेगी।

ऐसे हजारों परिवार।

चुनौतियां भी हैं

बजट का सही इस्तेमाल। भ्रष्टाचार न हो।

मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत। नियमित रिपोर्ट।

टीचर भर्ती अगर रुकी तो समस्या।

लेकिन यह सब तभी होगा जब दूसरे काम भी साथ चलें

टीचरों की भर्ती तेज हो। पुराने स्कूलों में मरम्मत। नई लैब बनें। डिजिटल क्लास चलें।

अगर सिर्फ फ्री किया और बाकी सुविधाएं नहीं बढ़ाईं तो भीड़ बढ़ेगी पर नतीजे नहीं।

सरकार को मॉनिटरिंग सिस्टम बनाना होगा। हर साल रिपोर्ट आए। कहां समस्या है पता चले।

एक और बात

यह योजना पूरे देश के लिए उदाहरण बन सकती है। दूसरे राज्य देखेंगे। अगर ओडिशा में सफल रही तो और जगहों पर भी ऐसी कोशिश हो सकती है।

अभी तो शुरुआत है। 2026-27 में पहला बैच आएगा। दो-तीन साल बाद असली तस्वीर साफ होगी।

मुझे लगता है यह कदम सही दिशा में है

माझी सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी। सिर्फ घोषणा नहीं, बजट भी दिया। 32 लाख छात्रों का नंबर छोटा नहीं। पांच साल का खर्चा भी बड़ा है।

अगर सही तरीके से अमल हुआ तो ओडिशा के युवा देश के दूसरे राज्यों से मुकाबला कर सकेंगे।

ग्रामीण इलाकों में स्कूल पहुंचने वाले बच्चों की संख्या बढ़ेगी। लड़कियों की शिक्षा में खास फर्क पड़ेगा। कई परिवार जो पहले हार मान लेते थे, अब कोशिश करेंगे।

राज्य की अर्थव्यवस्था को भी फायदा। ज्यादा पढ़े लिखे लोग बेहतर काम कर सकेंगे। छोटे व्यवसाय चलाएंगे। सरकारी नौकरियों के लिए तैयारी करेंगे।

लंबे समय में साक्षरता दर ऊपर जाएगी। स्वास्थ्य, जागरूकता, सब बेहतर होगा। क्योंकि पढ़ा हुआ आदमी बेहतर फैसले लेता है।

लेकिन यह आसान नहीं

टीचरों की कमी पूरी करनी होगी। पुराने स्कूलों को दुरुस्त करना होगा। नई किताबें, कंप्यूटर लैब – सब लगाना पड़ेगा।

सरकार को हर साल चेक करना होगा कहां काम अटक रहा है। सिर्फ पैसे देने से काम नहीं चलेगा।

फिर भी यह शुरुआत अच्छी है। पहले के मुकाबले बड़ा कदम। ओडिशा के बच्चे अब सपने देख सकेंगे।

पैसे की दीवार हट गई। अब मेहनत और सपनों की बारी।

ओडिशा के बच्चे आगे बढ़ें। राज्य आगे बढ़े।

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Ashutosh Behera

मैं आशुतोष बेहरा, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हूं और ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले से हूं। पिछले कुछ सालों से मैं सरकारी नौकरी, भर्ती नोटिफिकेशन, एडमिट कार्ड और रिजल्ट से जुड़ी जानकारी आप तक पहुंचा रहा हूं। मेरी कोशिश यही रहती है कि हर अपडेट सरल भाषा में और सही समय पर मिले, ताकि नौकरी की तैयारी कर रहे आप जैसे युवाओं को एक ही जगह भरोसेमंद जानकारी मिल सके। मैं हर खबर को आधिकारिक स्रोतों से जांचने के बाद ही यहां प्रकाशित करता हूं।

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